
ये ख्वाबों ख्यालों विचारों की दुनिया
मन को दुखाते कुछ सवालों की दुनिया
उस कोने पडी एक शराब की बोतल
इस कोने पडी खाली थालों की दुनिया
दौड्ते औ भागते रास्तों का फन्दा
या तन्हा सिसकती राहों की दुनिया
तू कौन क्या तेरा क्या उसका क्या मेरा
कुछ बनते बिगडते सहारॊं की दुनिया
एक कमरे मे पलते सपनों की दुनिया
एक कमरे मे ख्वाब के मज़ारों की दुनिया
HI AJANTAJI,
ReplyDeleteJUST VISITED YOUR BLOG.IT IS NOCE, IT IS MY SUGGESTION THAT ADD YOUR ALL POEMS INTO THE BLOG.
BEST REGARDS FROM
ASHOKAN MEENGOTH
DUBAI
ek kavita yaad ayi sarveshwar dayal ki
ReplyDeletebahut sunder likha hai badhaai
ReplyDeleteये दुनिया अगर मिल भी जाए तो क्या है।
ReplyDeleteब्लागिंग में आपका स्वागत है।
और लिखिए।
पढ़ कर महानगरों का जीवन चित्र आंखों के सामने बन जाता है.
ReplyDeleteअतिउत्तम...
Bad luck :( that I can't read Hindi but sketches describe them to a great extent ..... those are simply amazing .... really feeling good to realize that I have your association ....
ReplyDeleteWith regards,
Sid
Are wah, kya baat hai, bahut achha likha hai aapane
ReplyDeleteये ख्वाबों ख्यालों विचारों की दुनियाँ
मन को दुखाते कुछ सवालों की दुनियाँ
उस कोने पडी एक शराब की बोतल
इस कोने पडी खाली थालों की दुनियाँ
ye chaar line to wakayi Bemishal / damdar hain
बहुत अच्छी कविता है। "दुनियाँ" शब्द को सही कर लें तो ठीक रहेगा, यह अशुद्ध है, शुद्ध शब्द है " दुनिया " । धन्यवाद।
ReplyDeleteडा० व्योम